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India News: Supreme Court News: महुआ मोइत्रा को झटका, AIF-FPI के असली निवेशकों की जानकारी सार्वजनिक कराने की याचिका खारिज

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | India News: सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा की AIF और FPI के वास्तविक निवेशकों की पहचान सार्वजनिक कराने की मांग पर राहत देने से इनकार किया। जानिए कोर्ट ने क्या कहा।

सुप्रीम कोर्ट से महुआ मोइत्रा को झटका, AIF और FPI के असली निवेशकों की जानकारी सार्वजनिक कराने की मांग खारिज


29 अक्टूबर 2026 | Alam Ki Khabar: शेयर बाजार में निवेश करने वाले फंडों के पीछे असली मालिक कौन हैं, इस जानकारी को सार्वजनिक कराने की मांग पर तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। अदालत ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) को वैकल्पिक निवेश फंड (AIF), विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) और उनके मध्यस्थों के वास्तविक लाभार्थी मालिकों तथा निवेश पोर्टफोलियो का पूरा ब्योरा आम जनता के सामने रखने का निर्देश देने से इनकार कर दिया।


गुरुवार को न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना, न्यायमूर्ति आर. महादेवन और न्यायमूर्ति डीके उपाध्याय की पीठ ने कहा कि जब इस तरह के सार्वजनिक खुलासे को अनिवार्य बनाने वाला मौजूदा कानूनी या नियामकीय ढांचा ही नहीं है, तो अदालत अपने आदेश से नई व्यवस्था लागू नहीं करा सकती।


अदालत ने नई नीति बनाने की सीमा बताई


महुआ मोइत्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी कि शेयर बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए यह जानना जरूरी है कि निवेश के पीछे वास्तव में कौन लोग हैं। उनके अनुसार, निवेशक फंडों और अन्य संस्थाओं के जटिल ढांचे के कारण वास्तविक लाभार्थियों की पहचान आम लोगों के लिए स्पष्ट नहीं हो पाती। इससे बाजार में संभावित गड़बड़ी और शेयरों की कीमतों में हेरफेर को लेकर सवाल उठ सकते हैं।


हालांकि, पीठ ने कहा कि यदि किसी विषय पर पहले से कानून या नियामकीय नियम मौजूद हों और संबंधित संस्था उनका पालन न कर रही हो, तो अदालत अनुपालन का निर्देश दे सकती है। लेकिन यहां मांगी गई राहत के लिए एक नई सार्वजनिक खुलासा व्यवस्था तैयार करनी पड़ेगी, जो अदालत के इस मामले में अधिकार क्षेत्र से बाहर है।


SEBI के पास जानकारी और जनता के लिए खुलासे में अंतर


सुनवाई के दौरान SEBI की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का विरोध किया। उनका पक्ष था कि नियामकीय निगरानी के लिए जरूरी जानकारी SEBI और संबंधित कस्टोडियन को उपलब्ध कराई जाती है। याचिका में मांग इससे आगे बढ़कर जानकारी को आम जनता के लिए सार्वजनिक करने की थी।


महुआ मोइत्रा की याचिका में खुदरा निवेशकों के हितों और वित्तीय बाजार में पारदर्शिता का हवाला दिया गया था। प्रशांत भूषण ने दलील दी कि आम निवेशकों को भी यह समझने का अवसर मिलना चाहिए कि कंपनियों में बड़े निवेश के पीछे किन लोगों का वास्तविक नियंत्रण है।


फैसले का मतलब क्या है?


सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला नहीं दिया कि वास्तविक निवेशकों की पहचान सार्वजनिक करना सही है या गलत। अदालत ने मुख्य रूप से यह तय किया कि मौजूदा कानूनी व्यवस्था के अभाव में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत ऐसी नई अनिवार्य व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया जा सकता है या नहीं। पीठ ने इस आधार पर याचिका पर मांगी गई राहत देने से इनकार कर दिया।


इस फैसले के बाद AIF और FPI के वास्तविक लाभार्थियों की जानकारी आम जनता के लिए अनिवार्य रूप से सार्वजनिक कराने का मुद्दा कानून और नियामकीय नीति के दायरे में बना हुआ है।


पूरी खबर पढ़ने के लिए Alam Ki Khabar पढ़ें।


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